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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025: ब्रह्मसरोवर बना लोक संस्कृति का महाकुंभ

कुरुक्षेत्र का ब्रह्मसरोवर इन दिनों किसी जादुई दुनिया से कम नहीं लग रहा। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 शुरू होते ही देश के कोने-कोने से लाखों लोग यहां पहुंच गए हैं। कोई गीता की पावन भूमि के दर्शन को आया है, तो कोई सिर्फ इस अनोखे माहौल को जीने और यादों में कैद करने।

शिल्प और सरस मेले में उड़ी लोगों की होश

उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र का शिल्प मेला और डीआरडीए का सरस मेला तो जैसे खरीदारों पर छा गया। हाथ की बनी ज्वेलरी, राजस्थानी जूतियां, कश्मीरी शॉल, पंजाबी परांदे, हरियाणवी मिट्टी के खिलौने – जो देखो वही उठा ले जा रहा है। खाने के शौकीनों के लिए ताऊ बलजीत की मशहूर गोहाना जलेबी और राजस्थान का गरमा-गरम चूरमा लाइन लगवा रहा है। लोग प्लेट लिए एक-दूसरे से पूछ रहे हैं, “भाई जलेबी कितनी मीठी है?”

राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में जाना हरियाणा और मध्य प्रदेश की आत्मा

जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में हरियाणा और मध्य प्रदेश के पैवेलियन सबसे ज्यादा भीड़ खींच रहे हैं। यहां लोग पुराने गहने, लोक वेशभूषा, लुप्त हो रही बोलियां और परंपराएं देखकर भावुक हो जा रहे हैं। कई बच्चे पहली बार देख रहे हैं कि उनके दादा-परदादा कैसे रहते थे। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के स्टॉल पर भी अच्छी भीड़ है, लोग फॉर्म भरवा रहे हैं और जानकारी ले रहे हैं।

ब्रह्मसरोवर के घाटों पर देश का लोक नृत्य महोत्सव

शाम ढलते ही ब्रह्मसरोवर के घाट सचमुच लोक संस्कृति के महाकुंभ में बदल जाते हैं। जम्मू-कश्मीर का रौफ, पंजाब की भांगड़ा-गिद्दा, महाराष्ट्र का लावणी, छत्तीसगढ़ का पंथी, राजस्थान का कालबेलिया, हिमाचल का नाटी, बंगाल का छौ, असम का बिहू – एक ही मंच पर सब कुछ। दर्शक तालियां बजाते-बजाते थक नहीं रहे और कई तो खुद ही कलाकारों के साथ नाचने लगे।

बीन, तुम्बा और ढोल की धुन ने जगाई सरोवर में लहरें

सबसे सुंदर नजारा तो तब होता है जब बुजुर्ग कलाकार बीन, तुम्बा और ढोल लेकर सरोवर किनारे बैठते हैं। उनकी उंगलियों से निकली धुन इतनी पवित्र लगती है कि ब्रह्मसरोवर का पानी भी जैसे लय में थिरकने लगता है। दूर तक लहरें नाचती दिखती हैं। लोग कह रहे हैं, “ऐसा लग रहा है पानी भी इनकी धुन पर मस्त हो गया है।”

पद्मिनी कोल्हापुरी ने बिखेरा श्रीकृष्ण रस

महोत्सव के पहले दिन का सबसे यादगार पल रहा बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरी का कार्यक्रम। जैसे ही वे मंच पर आईं, पूरा ब्रह्मसरोवर तालियों से गूंज उठा। श्रीकृष्ण पर आधारित उनका नाट्य और गायन देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए। गोपियों के साथ रासलीला, यमुना किनारे बांसुरी की तान – सब कुछ ऐसा लगा जैसे कुरुक्षेत्र सचमुच वृंदावन बन गया हो।

लोग देर तक कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी मंच के सामने खड़े रहे और पद्मिनी मैम से ऑटोग्राफ लेते रहे। एक महिला ने तो कहा, “आज लगा भगवान कृष्ण खुद हमारे सामने नाच रहे थे।”

कुल मिलाकर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कृति, भक्ति और एकता का जीता-जागता मेला बन गया है। अगर आप अभी तक नहीं पहुंचे हैं तो जल्दी कीजिए, क्योंकि ये यादें जिंदगी भर साथ रहेंगी।

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